कालेश्वरम तेलंगाना 01 मई 2026
संवाददाता टी.अमितकुमार
--- एक पटल पर दो लिंग का अद्भुत नजारा पूरे प्रपंच में कही नही--
--श्लोक--
!! काशाय मरण मुक्ति कालेश्वराय दर्शन मुक्ति !!
अर्थ :- काशी में मरनोउपरांत मुक्ति मिलती है।
(अस्तिया गंगा में विसर्जित करने के बाद)
कालेश्ववर में दर्शन,स्मरन मात्र से मुक्ति ( मोक्ष) प्राप्त होता है
इस लिये अद्भुत अलौकिक अद्वित्तीय है
!! कालेश्वरम!!
जो सिवनी जिले में उद्गम होता है और वहां से वह दक्षिण की और बहती आती है और गड़चिरोली के चपराला में वरदा (वर्धा) नदी से मिलकर प्रणीता ( प्राणहिता) के नामसे आगे दक्षिण की और बहती है और कालेश्ववरम में आकर गोदावरी में समाविष्ट हों जाती है और त्रिवेणी संगम में गुप्त सरस्वती अन्तरवाहिनी बहती है। इस तरह पाच नदियो के पवित्र जल से यह संगम पावन होता है। भक्त इस संगम में नहाकर पुनीत हों जाते है।
!! यमराज को कैसे मिला प्रथम पूजा का वरदान!!
सतयुग में भूलोक वासी अपने जीवन मुक्ति के लिए शिव की उपासना कर शिवलोक सानिध्य प्राप्त किया करते थे इस वजह से नरक लोक में यम धर्मराज का कामकाज मुश्किल हो गया तब यम धर्मराज ने भगवान शिव की कठोर उपासना कर प्रत्यक्ष कर लिया और कहा प्रभु भूलोकवासी आपके चरण सानीदय में सायुज पा रहे हैं मैं निष्क्रिय हो गया हूं मेरे नरक लोक में कोई काम नहीं रहा प्रभु ।
भूलोक में मेरा तिरस्कार होता है और भूलोक वासी मुझसे घृणा करते हैं संसार की रचना तो आप लोगों ने ही की और आपने मुझे जो कार्य सोपा है मैं वही कार्य कर रहा हूं तो प्रभु मेरा तिरस्कार क्यों ?
प्रभु आप मार्गक्रमण करें तब भगवान शिव ने यमराज को वरदान दिया आने वाले युग में दक्षिण भारत क्षेत्र में हम दोनों एक ही पाण पटल पर विराजमान होंगे वह पुण्यक्षेत्र कालेश्वर मुक्तेश्वर के नाम से जाना जाएगा।
पहले आप की पूजा होगी उपरान्त मेरी आप कालेश्वर के नाम से जाने जाएंगे और मैं मुक्तेश्वर इस तरह से जो भी आप की पूजा पहले करेगा उपरांत मेरी पूजा करेगा वह भक्त को मोक्ष मिल जायेगा
युगों युगों से इस पुण्य क्षेत्र में कालेश्वर मुक्तेश्वर स्वामी की पूजा होती आ रही है और इस तरह से यमराज ने प्रथम पूजा का वरदान प्राप्त किया
शास्त्रों में वर्णित है।
कैसे आये इस पावन तीर्थ पर
कालेश्वर यह गाव तेलंगाना के भूपालपल्ली जिले में उत्तर दिशा की और है। कालेश्वर आने के लिये दक्षिण की और जाने वाली ट्रेन से आया जा सकते है।
नागपुर से कुल 7 घण्टे का प्रवास होता है ट्रेन से आने पर मंचरियाल जंक्शन पर उतरकर वहां से बस द्वारा कालेश्वरम जा सकते है मंचरियाल से कालेश्वरम 70 कि मि की दूरी है।
सुविद्याए
कालेश्वरम में रुखने के लिये मन्दिर के गेस्ट हाउस,और प्रायवेट लॉज,होटल मौजुद है।
निष्कर्ष
कालेश्ववर दर्शन से इस जन्म को मोक्ष प्राप्त जाता है।
टी.अमितकुमार
9948993033



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